NAMAN

NAMAN
SMILE

Tuesday, 8 December 2015

Phool

अलग अन्दाज में ये फूल स्वागत सबका करते हैं 
ना शिकवा ,ना शिकायत ,ना गिला ना बैर करते हैं 
जब भी मिलते हैं हंस के मिलते हैं जिंदादिली से ये
खुशबुएँ देने का ये कार्य स्वार्थ बगैर करते हैं
















Tuesday, 9 June 2015

SMILE PLEASE BLUE BOTTLE

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च्छर  मक्खी को पाला जा रहा है 
गन्दगी को सम्भाला जा रहा है       
कहाँ जाये बदबू को छोड़ कर 
शहर बीच घर के पास एक नाला जा रहा है 
                                            शालिनी शर्मा

NYAY KI AS LEKAR

 न्याय की आस लेकर वो घूम रहे थे 
वो रकम थी मोटी जिसने सच छिपा दिया  

पैसा नही है सबकुछ वो ये समझते थे 
पर पैसा ही है सबकुछ उनको बता दिया

पूरी लगन से वो हुनर अपना दिखाते हैं
 पल में उन्होंने सच को झूठ से सजा दिया

 वो घर सुकूं से सोने का सपना सजाये थे
 एक काल ने साहिब की घर ऑफिस बना दिया

तिकड़म जुगाड़बाजी चापलूसी और अदा 
उनके इन्ही गुणों ने उन्हें सब दिला दिया





 
                                      SAVE US            
                                                                 शालिनी शर्मा 

Sunday, 7 June 2015

DESTINY

है कोन जो बर्बादी का इन्तजाम कर रहा है
खुद बैल उसे मारे ऐसा काम कर रहा है
अपना सुकूँ और चैन खुद हराम हराम कर रहा है
खुद घिर के आग में ,हवा बदनाम कर रहा है
जो था खिलाडी नांदा ,वो आराम कर रहा है
महनत से खेला जो वो जग में नाम कर रहा है
ये भाग्य है जो जीतना नाकाम कर रहा है
बाजी पलट वो उसका घर नीलाम कर रहा है  
            अन्तर 
जो तेरे पास है मुझे वो मिल नही सकता
जो मेरे पास है वो तुझसे झिल नही सकता
मिला उपहार में सोने का एक पालना तुझको
जिसमे दासी ने हमेशा तुझे  झूला झुलाया है
मगर मुझको मेरी माँ ने डाल के कपड़े का झूला
लोरियाँ दे के एक पेड़ के नीचे सुलाया है
सिले हैं ऐसे मोती के कोई भी हिल नहीं सकता
छेड़ इतने मेरे झूले में  कोई सिल नहीं सकता
       जो   -----------------------
बना के नये नये व्यंजन सजा दिये तेरे लिये
पलंग भी गद्देदार है ,खुशबूदार है तेरा
मुझे भर पेट रोटियां मिले कभी कभी यंहा
और सोने को फुटपाथ ,ये नसीब है मेरा
कैसे कहूं तू फूल वो जो खिल नहीं सकता
कैसे कहूं मैं घाव वो जो छिल नहीं सकता
        जो ------------------------
                             शालिनी शर्मा     

Friday, 22 May 2015

chhand

कंहा थे मगर अब कँहा आ गये हैं हम 
सारी चीजे अच्छी अच्छी छोड़ छोड़ के 
सुख ,चैन ,शान्ति ,आराम सब गंवा दिया 
हमने पश्चिम के पीछे दौड़ दौड़ के 
                          शालिनी शर्मा 

Friday, 15 May 2015

lahu na bahe vyarth

पत्थर दिल भी विस्फोटो से
पिघल पिघल रह जाता है 
निर्दोषो का लहू सभी को 
प्रश्नचिन्ह दे जाता है 
एक आग बुझने ना पाये 
घर दूजा जल जाता है 
बड़ो का हो या बच्चो का 
शव तो शव कहलाता है
                     शालिनी शर्मा  
                      

Friday, 8 May 2015

tangi ka jahar




         
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Poor indian family Stock Photo

  मजदूर 
वो घर का द्वार ,धीरे धीरे खोलने लगा
खर्चो को सोच भय से, वो डोलने लगा 
पत्नी को देख ,जेब वो टटोलने लगा 
मजदूरी देख कम, वो कड़वा  बोलने लगा 
पैसे से घर की शान्ति को तोलने लगा 
मज़बूरी का विष रिश्तों में वो घोलने लगा 
                                शालिनी शर्मा  

Thursday, 7 May 2015

nyay

न्याय की नजर में सब एक समान हैं 
चाहे वो गरीब हो चाहे सलमान हैं 
                                                                शालिनी शर्मा 

Wednesday, 6 May 2015

Suvicha

छल, झूठ ,कपट, अन्याय यंहा
मानवता की सिसकारी है 
धरती है लहूलुहान  यँहा
 अम्बर बटने की बारी है 
     ये तेरा है ,ये मेरा है 
     चंहु ओर ही मारामारी है 
     हर तरफ है लूट खसोट यंहा 
     संकट में दुनिया सारी है 
हर तरफ भूख है ,तृष्णा है 
नहीं ये संस्कृति हमारी है 
आदर्शो की उच्च विरासत के 
हम तो अधिकारी हैं 
        कंही गुम हो गया हमारा भारत 
        ढूंढे उसे सजाये हम 
        सदाचार ,अपनत्व ,प्रेम की 
        माला नई बनाये हम
गौरवशाली इतिहास हमारा
त्याग हमें सिखलाता है 
गांधी ,और राम लखन का स्मरण 
सही मार्ग दिखलाता है 
         श्री राम ने सन्तोषी बन के 
         सुख, सुविधाओं का त्याग किया 
         गाँधी जी ने भी परोपकार में 
        अपना जीवन त्याग दिया 
सही आचरण बच्चो को
 सिखलाना बहुत जरुरी है 
बिन त्याग और संघर्ष ,समर्पण के 
शिक्षाएं अधूरी है 
                               शालिनी शर्मा 

Tuesday, 5 May 2015

GAJAL mhfil se hta

महफ़िल से हटा उसको वो महफ़िल पे छा गया 
उसका हुनर दिखा के वाह वाही पा गया 
   दुश्मन से सावधान था वो हर जगह मगर 
    वो दोस्त था जीवन में जिससे धोखा खा गया 
जीवन में नहीं होता सारा कुछ सही सही 
उसका भी बुरा वक्त अब जीवन में आ गया 
     कहते हैं ठोकरों से लोग गिर के सम्भलते 
     उसको भी खा के ठोकरे  सम्भलना आ गया 
फितरत नहीं थी उसकी किसी से करे गिला 
वो हसं के दगाबाजी को उसकी भुला गया 
                                शालिनी शर्मा  

Tuesday, 7 April 2015

PODHE LAGAO

वृक्षों को उगा के कर धरती का श्रंगार 
पोधे मित्र हमारे हैं जीवन का आधार 
       जंगल  कटेंगे होगी ताप में वृद्धि 
       ग्लेशियर पिघल कर देंगे जल में भी वृद्धि 
       मौसम में परिवर्तन भी होगा लगातार 
पोधे- - - - - - - - - - - - - --
       ग्लोबल वार्मिंग की ये समस्या 
        co2  के कारण है ये समस्या 
       सोचो  co2 का अब ना होवे विस्तार
पोधे - - - - - - - - - - - - - -
       रोग मिटाये ,करते ईंधन की पूर्ति 
       आक्सीजन ताजी देती स्फूर्ति 
       पोधो से होता है पर्यावरण में सुधार 
पोधे - - - - - - - - - - - - - -
                           शालिनी शर्मा  




Monday, 6 April 2015

SHIKHAR KI PROBLEM


उफ़ ये पढ़ाई की सिरदर्दी, चैन नहीं लेने देती 
    टीचर है निर्दयी देखो , नंबर हमको वो  नहीं देती 



जाते हुए जँहा से उसने मुझे पुकारा 
थमती हुई नजर से आँख खोल के निहारा 
हांथो में हाथ लेके मैंने दिया सहारा 
पर धीमी होती नब्ज का कुछ और था इशारा 
उम्मीद की किरण ना थी गमगीन था नजारा 
सांसो की डोर उसकी टूटी जो था हमको प्यारा 
ईश्वर के हाथ में है जीवन मरण हमारा 
नश्वर शरीर है यहां पे कुछ नहीं तुम्हारा 
                                           शालिनी शर्मा 

Sunday, 5 April 2015

MUJHE BACHAO

                                                               प्रकृति
अब कहां हूँ मैं ,मैं कहीं नही , मुझे नही कभी पहचाना है 
मुझे देखो  मैं हूँ लुटी प्रकृति ,जिसको तुम्हे बचाना है 
      दुनिया का अजब दस्तूर यहाँ उगते सूरज का जमाना है 
      मैं ढलती हुई एक शाम हर कोई क्यों मुझसे बेगाना है 
मेरा दिल संरक्षित वन जैसा ,वर्जित शिकारी का आना है 
माली बन कर आओ जो तुमको मेरे दिल में आना है 
     झरनो की है चंचलता मुझमे ,हिरणो सा मेरा इठलाना है 
    नदियों सा है निर्मल तन मेरा ,कोयल का गीत मेरा गाना है 
मुझमे चन्दन की महक काम मेरा  सुगंध फैलाना है 
मैं चिड़ियों की  हूँ चहक परिंदो सा मेरा चहचहाना है 
    मैं तितली की मस्ती हूँ मुझको ,फूलों पर मंडराना है 
    मैं मधुमक्खी की बस्ती हूँ, मुझे मीठा शहद बनाना है 
मैं मोर बादलों संग मगन, मेरा काम नाच दिखलाना है 
मैं बदली हूँ छायी हूँ गगन, मौसम का रंग मस्ताना है 
     फूलों की ही कोमलता से नहीं इस बगिया को महकना है 
     कैक्टस, गुलाब के काँटों को भी खुश होकर अपनाना है 
आयी जुलाई बीता है जून बस मानसून को आना है 
वर्षा की फुंहारों का जूनून धरती की प्यास बुझाना है 
    सूरत देखी तूने मेरी, सीरत से मेरी अंजाना है 
    मैं जंगली फूल सही,, पर भवँरा मेरा भी दीवाना है 
मैं हरियाली की चादर हूँ ,मुझे धरा को स्वर्ग बनाना है 
वृक्ष उगा के जगह जगह अब इस धरती को बचाना है 

                                                                शालिनी शर्मा 

Wednesday, 1 April 2015

GAJAL MERI NAJAR SE GIR KE

मेरी नजर से गिर के, वो फिर ना उठ सका
ऐसी अना भी क्या ना जो थोड़ा सा झुक सका 
      उसने मुझे अन्जाने में लूटा घड़ी घड़ी 
      वाकिफ हुआ जो उससे मैं तब फिर ना लुट सका 
मैंने भी दिये जख्म उसे याद जो रहे 
मैं ना अकेला जख्मों के फंदो में घुट सका 
       चलती सड़क पे भीड़ के वो सामने लुटा 
       उसकी  मदद को एक भी बन्दा ना रुक सका 
सोहबत बुरी थी मुझमें भी  उसका  असर हुआ 
जितनी थी बुरी लत लगी ना उनसे छुट सका 
       गर्दिश में मर गया वो भूख से तड़प तड़प 
       उसके लिये कफ़न का कपड़ा ना जुट सका 
                                                शालिनी शर्मा           

GAGAL muskuraye hue

मुस्कुराये हुए इक जमाना हुआ 
तू क्यों इस कदर खुद से इतना खफा है 
जो कहता है वो, तू उसे भूल जा 
बड़ी तीखी सी जालिम ,ये उसकी जुबां है 
      नजरो की भाषा को पढ़ नासमझ 
      उसकी झुकती नजर ने सब कुछ कहा है 
      गलतफहमियों के भंवर से निकल 
      दोस्ताने  में ना उसके कोई दगा है 
तू रिश्तो को कड़वा ना कर नासमझ 
उम्र गुजरी है तब एक रिश्ता बना है 
कोहरा है, ये धुंध छट जायेगी 
तू पूछेगा जब ,बात क्या ,क्या गिला है 
                                        शालिनी शर्मा   
मन से लगा कर किसी की कोई बात मत रखो गलतफहमियां दूरियां और बढ़ाती हैं गिले शिकवे कह सुन कर ही दूर होते हैं बिना बात किये हम कभी कभी बहुत अच्छा साथी खो देते हैं।