प्रकृति
अब कहां हूँ मैं ,मैं कहीं नही , मुझे नही कभी पहचाना है
मुझे देखो मैं हूँ लुटी प्रकृति ,जिसको तुम्हे बचाना है
दुनिया का अजब दस्तूर यहाँ उगते सूरज का जमाना है
मैं ढलती हुई एक शाम हर कोई क्यों मुझसे बेगाना है
मेरा दिल संरक्षित वन जैसा ,वर्जित शिकारी का आना है
माली बन कर आओ जो तुमको मेरे दिल में आना है
झरनो की है चंचलता मुझमे ,हिरणो सा मेरा इठलाना है
नदियों सा है निर्मल तन मेरा ,कोयल का गीत मेरा गाना है
मुझमे चन्दन की महक काम मेरा सुगंध फैलाना है
मैं चिड़ियों की हूँ चहक परिंदो सा मेरा चहचहाना है
मैं तितली की मस्ती हूँ मुझको ,फूलों पर मंडराना है
मैं मधुमक्खी की बस्ती हूँ, मुझे मीठा शहद बनाना है
मैं मोर बादलों संग मगन, मेरा काम नाच दिखलाना है
मैं बदली हूँ छायी हूँ गगन, मौसम का रंग मस्ताना है
फूलों की ही कोमलता से नहीं इस बगिया को महकना है
कैक्टस, गुलाब के काँटों को भी खुश होकर अपनाना है
आयी जुलाई बीता है जून बस मानसून को आना है
वर्षा की फुंहारों का जूनून धरती की प्यास बुझाना है
सूरत देखी तूने मेरी, सीरत से मेरी अंजाना है
मैं जंगली फूल सही,, पर भवँरा मेरा भी दीवाना है
मैं हरियाली की चादर हूँ ,मुझे धरा को स्वर्ग बनाना है
वृक्ष उगा के जगह जगह अब इस धरती को बचाना है
शालिनी शर्मा
अब कहां हूँ मैं ,मैं कहीं नही , मुझे नही कभी पहचाना है
मुझे देखो मैं हूँ लुटी प्रकृति ,जिसको तुम्हे बचाना है
दुनिया का अजब दस्तूर यहाँ उगते सूरज का जमाना है
मैं ढलती हुई एक शाम हर कोई क्यों मुझसे बेगाना है
मेरा दिल संरक्षित वन जैसा ,वर्जित शिकारी का आना है
माली बन कर आओ जो तुमको मेरे दिल में आना है
झरनो की है चंचलता मुझमे ,हिरणो सा मेरा इठलाना है
नदियों सा है निर्मल तन मेरा ,कोयल का गीत मेरा गाना है
मुझमे चन्दन की महक काम मेरा सुगंध फैलाना है
मैं चिड़ियों की हूँ चहक परिंदो सा मेरा चहचहाना है
मैं तितली की मस्ती हूँ मुझको ,फूलों पर मंडराना है
मैं मधुमक्खी की बस्ती हूँ, मुझे मीठा शहद बनाना है
मैं मोर बादलों संग मगन, मेरा काम नाच दिखलाना है
मैं बदली हूँ छायी हूँ गगन, मौसम का रंग मस्ताना है
फूलों की ही कोमलता से नहीं इस बगिया को महकना है
कैक्टस, गुलाब के काँटों को भी खुश होकर अपनाना है
आयी जुलाई बीता है जून बस मानसून को आना है
वर्षा की फुंहारों का जूनून धरती की प्यास बुझाना है
सूरत देखी तूने मेरी, सीरत से मेरी अंजाना है
मैं जंगली फूल सही,, पर भवँरा मेरा भी दीवाना है
मैं हरियाली की चादर हूँ ,मुझे धरा को स्वर्ग बनाना है
वृक्ष उगा के जगह जगह अब इस धरती को बचाना है
शालिनी शर्मा
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