जाते हुए जँहा से उसने मुझे पुकारा
थमती हुई नजर से आँख खोल के निहारा
हांथो में हाथ लेके मैंने दिया सहारा
पर धीमी होती नब्ज का कुछ और था इशारा
उम्मीद की किरण ना थी गमगीन था नजारा
सांसो की डोर उसकी टूटी जो था हमको प्यारा
ईश्वर के हाथ में है जीवन मरण हमारा
नश्वर शरीर है यहां पे कुछ नहीं तुम्हारा
शालिनी शर्मा
थमती हुई नजर से आँख खोल के निहारा
हांथो में हाथ लेके मैंने दिया सहारा
पर धीमी होती नब्ज का कुछ और था इशारा
उम्मीद की किरण ना थी गमगीन था नजारा
सांसो की डोर उसकी टूटी जो था हमको प्यारा
ईश्वर के हाथ में है जीवन मरण हमारा
नश्वर शरीर है यहां पे कुछ नहीं तुम्हारा
शालिनी शर्मा
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