NAMAN

NAMAN
SMILE

Monday, 6 April 2015

जाते हुए जँहा से उसने मुझे पुकारा 
थमती हुई नजर से आँख खोल के निहारा 
हांथो में हाथ लेके मैंने दिया सहारा 
पर धीमी होती नब्ज का कुछ और था इशारा 
उम्मीद की किरण ना थी गमगीन था नजारा 
सांसो की डोर उसकी टूटी जो था हमको प्यारा 
ईश्वर के हाथ में है जीवन मरण हमारा 
नश्वर शरीर है यहां पे कुछ नहीं तुम्हारा 
                                           शालिनी शर्मा 

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