न्याय की आस लेकर वो घूम रहे थे
वो रकम थी मोटी जिसने सच छिपा दिया
पैसा नही है सबकुछ वो ये समझते थे
पर पैसा ही है सबकुछ उनको बता दिया
पूरी लगन से वो हुनर अपना दिखाते हैं
पल में उन्होंने सच को झूठ से सजा दिया
वो घर सुकूं से सोने का सपना सजाये थे
एक काल ने साहिब की घर ऑफिस बना दिया
तिकड़म जुगाड़बाजी चापलूसी और अदा
उनके इन्ही गुणों ने उन्हें सब दिला दिया
SAVE US
शालिनी शर्मा
वो रकम थी मोटी जिसने सच छिपा दिया
पैसा नही है सबकुछ वो ये समझते थे
पर पैसा ही है सबकुछ उनको बता दिया
पूरी लगन से वो हुनर अपना दिखाते हैं
पल में उन्होंने सच को झूठ से सजा दिया
वो घर सुकूं से सोने का सपना सजाये थे
एक काल ने साहिब की घर ऑफिस बना दिया
तिकड़म जुगाड़बाजी चापलूसी और अदा
उनके इन्ही गुणों ने उन्हें सब दिला दिया
SAVE US
शालिनी शर्मा




No comments:
Post a Comment