NAMAN

NAMAN
SMILE

Wednesday, 1 April 2015

GAGAL muskuraye hue

मुस्कुराये हुए इक जमाना हुआ 
तू क्यों इस कदर खुद से इतना खफा है 
जो कहता है वो, तू उसे भूल जा 
बड़ी तीखी सी जालिम ,ये उसकी जुबां है 
      नजरो की भाषा को पढ़ नासमझ 
      उसकी झुकती नजर ने सब कुछ कहा है 
      गलतफहमियों के भंवर से निकल 
      दोस्ताने  में ना उसके कोई दगा है 
तू रिश्तो को कड़वा ना कर नासमझ 
उम्र गुजरी है तब एक रिश्ता बना है 
कोहरा है, ये धुंध छट जायेगी 
तू पूछेगा जब ,बात क्या ,क्या गिला है 
                                        शालिनी शर्मा   
मन से लगा कर किसी की कोई बात मत रखो गलतफहमियां दूरियां और बढ़ाती हैं गिले शिकवे कह सुन कर ही दूर होते हैं बिना बात किये हम कभी कभी बहुत अच्छा साथी खो देते हैं।                                           

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