NAMAN

NAMAN
SMILE

Friday, 22 May 2015

chhand

कंहा थे मगर अब कँहा आ गये हैं हम 
सारी चीजे अच्छी अच्छी छोड़ छोड़ के 
सुख ,चैन ,शान्ति ,आराम सब गंवा दिया 
हमने पश्चिम के पीछे दौड़ दौड़ के 
                          शालिनी शर्मा 

Friday, 15 May 2015

lahu na bahe vyarth

पत्थर दिल भी विस्फोटो से
पिघल पिघल रह जाता है 
निर्दोषो का लहू सभी को 
प्रश्नचिन्ह दे जाता है 
एक आग बुझने ना पाये 
घर दूजा जल जाता है 
बड़ो का हो या बच्चो का 
शव तो शव कहलाता है
                     शालिनी शर्मा  
                      

Friday, 8 May 2015

tangi ka jahar




         
 Image result for images labour



Poor indian family Stock Photo

  मजदूर 
वो घर का द्वार ,धीरे धीरे खोलने लगा
खर्चो को सोच भय से, वो डोलने लगा 
पत्नी को देख ,जेब वो टटोलने लगा 
मजदूरी देख कम, वो कड़वा  बोलने लगा 
पैसे से घर की शान्ति को तोलने लगा 
मज़बूरी का विष रिश्तों में वो घोलने लगा 
                                शालिनी शर्मा  

Thursday, 7 May 2015

nyay

न्याय की नजर में सब एक समान हैं 
चाहे वो गरीब हो चाहे सलमान हैं 
                                                                शालिनी शर्मा 

Wednesday, 6 May 2015

Suvicha

छल, झूठ ,कपट, अन्याय यंहा
मानवता की सिसकारी है 
धरती है लहूलुहान  यँहा
 अम्बर बटने की बारी है 
     ये तेरा है ,ये मेरा है 
     चंहु ओर ही मारामारी है 
     हर तरफ है लूट खसोट यंहा 
     संकट में दुनिया सारी है 
हर तरफ भूख है ,तृष्णा है 
नहीं ये संस्कृति हमारी है 
आदर्शो की उच्च विरासत के 
हम तो अधिकारी हैं 
        कंही गुम हो गया हमारा भारत 
        ढूंढे उसे सजाये हम 
        सदाचार ,अपनत्व ,प्रेम की 
        माला नई बनाये हम
गौरवशाली इतिहास हमारा
त्याग हमें सिखलाता है 
गांधी ,और राम लखन का स्मरण 
सही मार्ग दिखलाता है 
         श्री राम ने सन्तोषी बन के 
         सुख, सुविधाओं का त्याग किया 
         गाँधी जी ने भी परोपकार में 
        अपना जीवन त्याग दिया 
सही आचरण बच्चो को
 सिखलाना बहुत जरुरी है 
बिन त्याग और संघर्ष ,समर्पण के 
शिक्षाएं अधूरी है 
                               शालिनी शर्मा 

Tuesday, 5 May 2015

GAJAL mhfil se hta

महफ़िल से हटा उसको वो महफ़िल पे छा गया 
उसका हुनर दिखा के वाह वाही पा गया 
   दुश्मन से सावधान था वो हर जगह मगर 
    वो दोस्त था जीवन में जिससे धोखा खा गया 
जीवन में नहीं होता सारा कुछ सही सही 
उसका भी बुरा वक्त अब जीवन में आ गया 
     कहते हैं ठोकरों से लोग गिर के सम्भलते 
     उसको भी खा के ठोकरे  सम्भलना आ गया 
फितरत नहीं थी उसकी किसी से करे गिला 
वो हसं के दगाबाजी को उसकी भुला गया 
                                शालिनी शर्मा