I love to write poetry. I am trying my best but your suggestions are required.So please stay with me.
NAMAN
SMILE
Tuesday, 10 June 2014
Monday, 9 June 2014
GEET
देखे हैं हमने ऐसे सवेरे सूरज पे हावी हैं धुंद और कोहरे
सायों से मुंह छिपाते देखे असली चेहरे
अर्थी के फूलो से से सजते देखे सेहरे
सूरज पे------------------
मेरे शहर में है ऐसी भी बस्ती
जहां सांसे महंगी मोते हैं सस्ती
खुशियां हैं बंदी गमो के हैं पहरे
सूरज पे ------------------
बचपन बुढ़ापे में अंतर ना कोई
जवानी जवां हो जहां जवानी पे रोई
मायूसियों ने छीने सपने सुनहरे
सूरज पे ----------
घर के बगीचे की खिलती कली थी
माली के आँचल में हंस के पली थी
दिन थे त्योहार ,होली दीवाली दशहरे
सूरज पे-----------------------
डाली से बिछड़ी तो घिर गयी गैरों में
आंधी उड़ा के ले गयी कुचली गयी पैरो में
कोमल हृदय है घायल घाव हैं गहरे
सूरज पे----------------------
अँखियों का सागर थमता नही है
कोई इलाज इनके गम का नही है
लाएं तबाही हरदम बिगड़ैल लहरें
सूरज पे -----------------------
समुंदर में तूफां है आगे ना जाओ
खतरा है ना किश्ती आगे बढ़ाओ
बुरे वक्त में सब हैं अंधे बहरे बहरे
सूरज पे ---------------------
शालिनी शर्मा
सायों से मुंह छिपाते देखे असली चेहरे
अर्थी के फूलो से से सजते देखे सेहरे
सूरज पे------------------
मेरे शहर में है ऐसी भी बस्ती
जहां सांसे महंगी मोते हैं सस्ती
खुशियां हैं बंदी गमो के हैं पहरे
सूरज पे ------------------
बचपन बुढ़ापे में अंतर ना कोई
जवानी जवां हो जहां जवानी पे रोई
मायूसियों ने छीने सपने सुनहरे
सूरज पे ----------
घर के बगीचे की खिलती कली थी
माली के आँचल में हंस के पली थी
दिन थे त्योहार ,होली दीवाली दशहरे
सूरज पे-----------------------
डाली से बिछड़ी तो घिर गयी गैरों में
आंधी उड़ा के ले गयी कुचली गयी पैरो में
कोमल हृदय है घायल घाव हैं गहरे
सूरज पे----------------------
अँखियों का सागर थमता नही है
कोई इलाज इनके गम का नही है
लाएं तबाही हरदम बिगड़ैल लहरें
सूरज पे -----------------------
समुंदर में तूफां है आगे ना जाओ
खतरा है ना किश्ती आगे बढ़ाओ
बुरे वक्त में सब हैं अंधे बहरे बहरे
सूरज पे ---------------------
शालिनी शर्मा
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