अन्तर
जो तेरे पास है मुझे वो मिल नही सकता
जो मेरे पास है वो तुझसे झिल नही सकता
मिला उपहार में सोने का एक पालना तुझको
जिसमे दासी ने हमेशा तुझे झूला झुलाया है
मगर मुझको मेरी माँ ने डाल के कपड़े का झूला
लोरियाँ दे के एक पेड़ के नीचे सुलाया है
सिले हैं ऐसे मोती के कोई भी हिल नहीं सकता
छेड़ इतने मेरे झूले में कोई सिल नहीं सकता
जो -----------------------
बना के नये नये व्यंजन सजा दिये तेरे लिये
पलंग भी गद्देदार है ,खुशबूदार है तेरा
मुझे भर पेट रोटियां मिले कभी कभी यंहा
और सोने को फुटपाथ ,ये नसीब है मेरा
कैसे कहूं तू फूल वो जो खिल नहीं सकता
कैसे कहूं मैं घाव वो जो छिल नहीं सकता
जो ------------------------
शालिनी शर्मा
जो तेरे पास है मुझे वो मिल नही सकता
जो मेरे पास है वो तुझसे झिल नही सकता
मिला उपहार में सोने का एक पालना तुझको
जिसमे दासी ने हमेशा तुझे झूला झुलाया है
मगर मुझको मेरी माँ ने डाल के कपड़े का झूला
लोरियाँ दे के एक पेड़ के नीचे सुलाया है
सिले हैं ऐसे मोती के कोई भी हिल नहीं सकता
छेड़ इतने मेरे झूले में कोई सिल नहीं सकता
जो -----------------------
बना के नये नये व्यंजन सजा दिये तेरे लिये
पलंग भी गद्देदार है ,खुशबूदार है तेरा
मुझे भर पेट रोटियां मिले कभी कभी यंहा
और सोने को फुटपाथ ,ये नसीब है मेरा
कैसे कहूं तू फूल वो जो खिल नहीं सकता
कैसे कहूं मैं घाव वो जो छिल नहीं सकता
जो ------------------------
शालिनी शर्मा
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