महफ़िल से हटा उसको वो महफ़िल पे छा गया
उसका हुनर दिखा के वाह वाही पा गया
दुश्मन से सावधान था वो हर जगह मगर
वो दोस्त था जीवन में जिससे धोखा खा गया
जीवन में नहीं होता सारा कुछ सही सही
उसका भी बुरा वक्त अब जीवन में आ गया
कहते हैं ठोकरों से लोग गिर के सम्भलते
उसको भी खा के ठोकरे सम्भलना आ गया
फितरत नहीं थी उसकी किसी से करे गिला
वो हसं के दगाबाजी को उसकी भुला गया
शालिनी शर्मा
उसका हुनर दिखा के वाह वाही पा गया
दुश्मन से सावधान था वो हर जगह मगर
वो दोस्त था जीवन में जिससे धोखा खा गया
जीवन में नहीं होता सारा कुछ सही सही
उसका भी बुरा वक्त अब जीवन में आ गया
कहते हैं ठोकरों से लोग गिर के सम्भलते
उसको भी खा के ठोकरे सम्भलना आ गया
फितरत नहीं थी उसकी किसी से करे गिला
वो हसं के दगाबाजी को उसकी भुला गया
शालिनी शर्मा
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