I love to write poetry. I am trying my best but your suggestions are required.So please stay with me.
NAMAN
SMILE
Saturday, 1 November 2014
Friday, 31 October 2014
MA
मेरी माँ मुझको बायो की
इक किताब सी लगती है
बीमारी में एंटीबायोटिक
का काम वो करती है
ऊर्जा का भंडार है माँ
मेरे जीवन की ज्योति है
माँ से ही सारे पोषक
तत्वों की पूर्ति होती है
शर्कराओं सी मीठी बातें
दर्द मेरा ले लेती हैं
सभी विटामिन मुझको
माँ की एक झलक दे देती है
पास में माँ के होने से
हार्मोन्स का स्राव भी ठीक रहे
हीमोग्लोबिन वाला ब्लड
पूरे शरीर में ठीक बहे
माँ आयरन है फास्फोरस माँ
माँ वृद्धि वाली इक प्रोटीन
माँ वसा भी है माँ सोडियम
माँ से मिलता है आयोडीन
माँ ही मेरी ऑक्सीजन है
माँ ही सारे एन्जाइम
पास ना हो माँ तो कटता ना
मेरा अच्छा टाइम
कैल्शियम माँ की पिटाई
हड्डी मजबूत बनाती है
चोट लगे तो प्यार का मरहम
माँ मेरी बन जाती है
बीमारी में एंटीबायोटिक
का काम वो करती है
ऊर्जा का भंडार है माँ
मेरे जीवन की ज्योति है
माँ से ही सारे पोषक
तत्वों की पूर्ति होती है
शर्कराओं सी मीठी बातें
दर्द मेरा ले लेती हैं
सभी विटामिन मुझको
माँ की एक झलक दे देती है
पास में माँ के होने से
हार्मोन्स का स्राव भी ठीक रहे
हीमोग्लोबिन वाला ब्लड
पूरे शरीर में ठीक बहे
माँ आयरन है फास्फोरस माँ
माँ वृद्धि वाली इक प्रोटीन
माँ वसा भी है माँ सोडियम
माँ से मिलता है आयोडीन
माँ ही मेरी ऑक्सीजन है
माँ ही सारे एन्जाइम
पास ना हो माँ तो कटता ना
मेरा अच्छा टाइम
कैल्शियम माँ की पिटाई
हड्डी मजबूत बनाती है
चोट लगे तो प्यार का मरहम
माँ मेरी बन जाती है
शालिनी शर्मा
gajal TU KIS GHADI MERA KHUD SE
तू किस घड़ी मेरा खुद से जुड़ाव देखेगा
कभी तो आके मेरे दिल के घाव देखेगा
है बेखुदी झुकी नजर है हड़बड़ाहट सी
तू आके कब मेरे चेहरे के भाव देखेगा
कभी तो ---------------
अभी तो मैं तेरे पैरो की आहटे सुनती
मेरी हो आहट कब मेरे तू पांव देखेगा
कभी तो ---------------
सभी से मिल के गुफ्तगूं तूने कर ली है
मेरी नजर की नमी कब बहाव देखेगा
कभी तो ---------------
तू जंहा वंहा मैं आती हूँ तेरी हर बात को सराहती हूँ
तू कब ये सब जुड़ाव देखेगा
कभी तो -------------
शालिनी शर्मा
कभी तो आके मेरे दिल के घाव देखेगा
है बेखुदी झुकी नजर है हड़बड़ाहट सी
तू आके कब मेरे चेहरे के भाव देखेगा
कभी तो ---------------
अभी तो मैं तेरे पैरो की आहटे सुनती
मेरी हो आहट कब मेरे तू पांव देखेगा
कभी तो ---------------
सभी से मिल के गुफ्तगूं तूने कर ली है
मेरी नजर की नमी कब बहाव देखेगा
कभी तो ---------------
तू जंहा वंहा मैं आती हूँ तेरी हर बात को सराहती हूँ
तू कब ये सब जुड़ाव देखेगा
कभी तो -------------

शालिनी शर्मा
Thursday, 30 October 2014
SAB KUCHH HAI PASS MERE
सब कुछ है पास मेरे
बस इक सिवाय तेरे
तूने कहा भुला दे
मेरे सारे कसमे वादे
तूने सजा सुनाई
पर ना खता बताई
ठहरी सी जिन्दगी है
बेनामी हर ख़ुशी है
तू दे गया अंधेरे
छीने सभी सवेरे
सब कुछ है ------------
वो बाग ,फूल ,चिड़ियाँ
तालाब की वो सीढ़ियां
वहाँ संग तेरे जाना
हसना ,वो गुनगुनाना
किस्से इधर उधर के
वो रिश्ते उम्र भर के
सब रिश्ते तोड़ डाले
दिल संभले ना संभाले
सुन खुशियों के लुटेरे
तेरी याद रहती घेरे
सब कुछ है -------------
शालिनी शर्मा
बस इक सिवाय तेरे
तूने कहा भुला दे
मेरे सारे कसमे वादे
तूने सजा सुनाई
पर ना खता बताई
ठहरी सी जिन्दगी है
बेनामी हर ख़ुशी है
तू दे गया अंधेरे
छीने सभी सवेरे
सब कुछ है ------------
वो बाग ,फूल ,चिड़ियाँ
तालाब की वो सीढ़ियां
वहाँ संग तेरे जाना
हसना ,वो गुनगुनाना
किस्से इधर उधर के
वो रिश्ते उम्र भर के
सब रिश्ते तोड़ डाले
दिल संभले ना संभाले
सुन खुशियों के लुटेरे
तेरी याद रहती घेरे
सब कुछ है -------------
शालिनी शर्मा
Tuesday, 28 October 2014
TU BHI SUNA KUCHH NAGME
तू भी सुना कुछ नग्में
मैं भी सुनाऊ गीत
तू बन जा मेरा हमदम
मैं तेरे मन का मीत
जो आँख मेरी नम हो
तू भी ना मुस्कुराये
मेरी हो चिंता गर कोई
तो तू भी सो ना पाये
आ बांधें दिल का बंधन
दिल में जगायें प्रीत
तू बन जा -------------
ऊँच नीच जाति भाषा
धर्म ना विचारे
इंसानियत के संग
सभी रिश्ते हों हमारे
मैं जीतू दिल को तेरे
तू भी मेरा दिल जीत
तू बन जा ---------------
आ मिल के ऐसी बस्ती
इस शहर में बसाएं
बुनियाद में ही जिसकी रस
बस प्यार का मिलायें
आ त्याग तू भी मैं भी त्यागूँ
छोटेपन की रीत
तू बन जा -----------------
शालिनी शर्मा
गाजियाबाद
मैं भी सुनाऊ गीत
तू बन जा मेरा हमदम
मैं तेरे मन का मीत
जो आँख मेरी नम हो
तू भी ना मुस्कुराये
मेरी हो चिंता गर कोई
तो तू भी सो ना पाये
आ बांधें दिल का बंधन
दिल में जगायें प्रीत
तू बन जा -------------
ऊँच नीच जाति भाषा
धर्म ना विचारे
इंसानियत के संग
सभी रिश्ते हों हमारे
मैं जीतू दिल को तेरे
तू भी मेरा दिल जीत
तू बन जा ---------------
आ मिल के ऐसी बस्ती
इस शहर में बसाएं
बुनियाद में ही जिसकी रस
बस प्यार का मिलायें
आ त्याग तू भी मैं भी त्यागूँ
छोटेपन की रीत
तू बन जा -----------------
शालिनी शर्मा
गाजियाबाद
Monday, 20 October 2014
HUNAR AA GYA
दिल की बातें छुपाने का हुनर आ गया
सबको अपना बनाने का हुनर आ गया
वो काबिल है तब वो समझा उसे
जब मक्खन लगाने का हुनर आ गया
सच कहा था तो ये दुनिया दुश्मन बनी
झूठ लबो पे सजाने का हुनर आ गया
दुनिया वैसी नही जैसी किताबो में है
सबको मुखोटे लगाने का हुनर आ गया
कड़वी बाते वो जब से कहने लगा
हमको जहर भी पचाने का हुनर आ गया
घर की चार दीवारी में नादान थे
दुनिया देखी सताने का हुनर आ गया
इस बाजार से तुमने सीखा बहुत
खोटा सिक्का चलाने का हुनर आ गया
शालिनी शर्मा
सबको अपना बनाने का हुनर आ गया
वो काबिल है तब वो समझा उसे
जब मक्खन लगाने का हुनर आ गया
सच कहा था तो ये दुनिया दुश्मन बनी
झूठ लबो पे सजाने का हुनर आ गया
दुनिया वैसी नही जैसी किताबो में है
सबको मुखोटे लगाने का हुनर आ गया
कड़वी बाते वो जब से कहने लगा
हमको जहर भी पचाने का हुनर आ गया
घर की चार दीवारी में नादान थे
दुनिया देखी सताने का हुनर आ गया
इस बाजार से तुमने सीखा बहुत
खोटा सिक्का चलाने का हुनर आ गया
शालिनी शर्मा
kavita SAMVEDNAO KA MAHAL
संवेदनाओ का महल खंडहर सा हो गया
आदमी यंहा पत्थर का हो गया
मैं डूब रही थी बचाने ना कोई आया
अब ये नजारा खेल के मंजर सा हो गया
घर मेरा जलता देख हाथ तापने लगा
घर उसका भी जल सकता क्यों निडर सा हो गया
अच्छी सलाह देना उसने बंद कर दिया
नेकी का पाठ तीर और खंजर सा हो गया
वो दो कदम भी साथ ना मुश्किल में चल सका
आसान राह खोज उस डगर का हो गया
चमगादड़ों को देख पंछी उलटे लटके हैं
उल्टा तरीका अब यहां असर का हो गया
जब नीर से नयन के विचलित ना वो हुआ
तो नीर नयन का समुन्दर सा हो गया
शालिनी शर्मा
BAPU NE DI DUHAYI
गीत
बापू ने दी दुहाई मुझे घर की आन की
चढ़ जा बलि औ बकरे ये फरमान हो गए
सपने कुछ और थे मगर हम घोड़ी चढ़ गये
हम घर की आन शान पे कुर्बान हो गये
बापू ने दी दुहाई मुझे घर की आन की
चढ़ जा बलि औ बकरे ये फरमान हो गए
सपने कुछ और थे मगर हम घोड़ी चढ़ गये
हम घर की आन शान पे कुर्बान हो गये
YE ATANKI BANDAR
दरवाजा खोल के वो मेरे
घर में आ गया
बन्दर था फ्रिज के फ्रूट
सारी सब्जी खा गया
सड़को पे निडर घूमता है
गैंग बना के
एक रोज तो किसी के वो
थप्पड़ लगा गया
दादागिरी दिखा रहा है
खों खों कर के ये
इसकी वजह से शहर पे
आतंक छा गया
हनुमान का ये वंशज
उत्पाती है बहुत
बिजली के तार हिला के
बिजली भगा गया
शालिनी
Thursday, 28 August 2014
gajal
नजरे झुका के वो मुझे सलाम कर रहा है
खामोश है जुबां नजर से काम कर रहा है
उसकी नजर में देखी है दुनिया से बगावत
मेरे लिए वो पार हद तमाम कर रहा है
उसकी नजर की हलचल कुछ कह रही है मुझसे
महफिल में कुछ कहे बिना बदनाम कर रहा है
ना जाने किस नशे का उसपे चढ़ा सुरूर
पैमाना खाली है नजर से जाम भर रहा है
मैने नजर झुका ली चेहरा घुमा लिया
फिर भी नजर से पीछा सरे आम कर रहा है
उसकी नजर से मुझको लगने लगा है डर
इजहारे मोहब्बत वो सुबह शाम कर रहा है
शालिनी शर्मा
वो दोस्त हों जो साथ चलते जरूरी नहीं
वो सुखी हो जो दिखते हंसते जरूरी नहीं
सब की मजबूरियां हैं निभाते चलो वक्त जैसा भी गुजरे बिताते चलो
दिन अच्छे ही कटते जरूरी जरूरी नही शालिनी शर्मा
खामोश है जुबां नजर से काम कर रहा है
उसकी नजर में देखी है दुनिया से बगावत
मेरे लिए वो पार हद तमाम कर रहा है
उसकी नजर की हलचल कुछ कह रही है मुझसे
महफिल में कुछ कहे बिना बदनाम कर रहा है
ना जाने किस नशे का उसपे चढ़ा सुरूर
पैमाना खाली है नजर से जाम भर रहा है
मैने नजर झुका ली चेहरा घुमा लिया
फिर भी नजर से पीछा सरे आम कर रहा है
उसकी नजर से मुझको लगने लगा है डर
इजहारे मोहब्बत वो सुबह शाम कर रहा है
शालिनी शर्मा
वो दोस्त हों जो साथ चलते जरूरी नहीं
वो सुखी हो जो दिखते हंसते जरूरी नहीं
सब की मजबूरियां हैं निभाते चलो वक्त जैसा भी गुजरे बिताते चलो
दिन अच्छे ही कटते जरूरी जरूरी नही शालिनी शर्मा
Tuesday, 10 June 2014
Monday, 9 June 2014
GEET
देखे हैं हमने ऐसे सवेरे सूरज पे हावी हैं धुंद और कोहरे
सायों से मुंह छिपाते देखे असली चेहरे
अर्थी के फूलो से से सजते देखे सेहरे
सूरज पे------------------
मेरे शहर में है ऐसी भी बस्ती
जहां सांसे महंगी मोते हैं सस्ती
खुशियां हैं बंदी गमो के हैं पहरे
सूरज पे ------------------
बचपन बुढ़ापे में अंतर ना कोई
जवानी जवां हो जहां जवानी पे रोई
मायूसियों ने छीने सपने सुनहरे
सूरज पे ----------
घर के बगीचे की खिलती कली थी
माली के आँचल में हंस के पली थी
दिन थे त्योहार ,होली दीवाली दशहरे
सूरज पे-----------------------
डाली से बिछड़ी तो घिर गयी गैरों में
आंधी उड़ा के ले गयी कुचली गयी पैरो में
कोमल हृदय है घायल घाव हैं गहरे
सूरज पे----------------------
अँखियों का सागर थमता नही है
कोई इलाज इनके गम का नही है
लाएं तबाही हरदम बिगड़ैल लहरें
सूरज पे -----------------------
समुंदर में तूफां है आगे ना जाओ
खतरा है ना किश्ती आगे बढ़ाओ
बुरे वक्त में सब हैं अंधे बहरे बहरे
सूरज पे ---------------------
शालिनी शर्मा
सायों से मुंह छिपाते देखे असली चेहरे
अर्थी के फूलो से से सजते देखे सेहरे
सूरज पे------------------
मेरे शहर में है ऐसी भी बस्ती
जहां सांसे महंगी मोते हैं सस्ती
खुशियां हैं बंदी गमो के हैं पहरे
सूरज पे ------------------
बचपन बुढ़ापे में अंतर ना कोई
जवानी जवां हो जहां जवानी पे रोई
मायूसियों ने छीने सपने सुनहरे
सूरज पे ----------
घर के बगीचे की खिलती कली थी
माली के आँचल में हंस के पली थी
दिन थे त्योहार ,होली दीवाली दशहरे
सूरज पे-----------------------
डाली से बिछड़ी तो घिर गयी गैरों में
आंधी उड़ा के ले गयी कुचली गयी पैरो में
कोमल हृदय है घायल घाव हैं गहरे
सूरज पे----------------------
अँखियों का सागर थमता नही है
कोई इलाज इनके गम का नही है
लाएं तबाही हरदम बिगड़ैल लहरें
सूरज पे -----------------------
समुंदर में तूफां है आगे ना जाओ
खतरा है ना किश्ती आगे बढ़ाओ
बुरे वक्त में सब हैं अंधे बहरे बहरे
सूरज पे ---------------------
शालिनी शर्मा
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