पत्थर दिल भी विस्फोटो से
पिघल पिघल रह जाता है
निर्दोषो का लहू सभी को
प्रश्नचिन्ह दे जाता है
एक आग बुझने ना पाये
घर दूजा जल जाता है
बड़ो का हो या बच्चो का
शव तो शव कहलाता है
शालिनी शर्मा
पिघल पिघल रह जाता है
निर्दोषो का लहू सभी को
प्रश्नचिन्ह दे जाता है
एक आग बुझने ना पाये
घर दूजा जल जाता है
बड़ो का हो या बच्चो का
शव तो शव कहलाता है
शालिनी शर्मा
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