NAMAN

NAMAN
SMILE

Friday, 15 May 2015

lahu na bahe vyarth

पत्थर दिल भी विस्फोटो से
पिघल पिघल रह जाता है 
निर्दोषो का लहू सभी को 
प्रश्नचिन्ह दे जाता है 
एक आग बुझने ना पाये 
घर दूजा जल जाता है 
बड़ो का हो या बच्चो का 
शव तो शव कहलाता है
                     शालिनी शर्मा  
                      

No comments:

Post a Comment