I love to write poetry. I am trying my best but your suggestions are required.So please stay with me.
NAMAN
SMILE
Tuesday, 9 June 2015
NYAY KI AS LEKAR
न्याय की आस लेकर वो घूम रहे थे
वो रकम थी मोटी जिसने सच छिपा दिया
पैसा नही है सबकुछ वो ये समझते थे
पर पैसा ही है सबकुछ उनको बता दिया
पूरी लगन से वो हुनर अपना दिखाते हैं
पल में उन्होंने सच को झूठ से सजा दिया
वो घर सुकूं से सोने का सपना सजाये थे
एक काल ने साहिब की घर ऑफिस बना दिया
तिकड़म जुगाड़बाजी चापलूसी और अदा
उनके इन्ही गुणों ने उन्हें सब दिला दिया
SAVE US
शालिनी शर्मा
वो रकम थी मोटी जिसने सच छिपा दिया
पैसा नही है सबकुछ वो ये समझते थे
पर पैसा ही है सबकुछ उनको बता दिया
पूरी लगन से वो हुनर अपना दिखाते हैं
पल में उन्होंने सच को झूठ से सजा दिया
वो घर सुकूं से सोने का सपना सजाये थे
एक काल ने साहिब की घर ऑफिस बना दिया
तिकड़म जुगाड़बाजी चापलूसी और अदा
उनके इन्ही गुणों ने उन्हें सब दिला दिया
SAVE US
शालिनी शर्मा
Sunday, 7 June 2015
DESTINY
है कोन जो बर्बादी का इन्तजाम कर रहा है
खुद बैल उसे मारे ऐसा काम कर रहा है
अपना सुकूँ और चैन खुद हराम हराम कर रहा है
खुद घिर के आग में ,हवा बदनाम कर रहा है
जो था खिलाडी नांदा ,वो आराम कर रहा है
महनत से खेला जो वो जग में नाम कर रहा है
ये भाग्य है जो जीतना नाकाम कर रहा है
बाजी पलट वो उसका घर नीलाम कर रहा है
खुद बैल उसे मारे ऐसा काम कर रहा है
अपना सुकूँ और चैन खुद हराम हराम कर रहा है
खुद घिर के आग में ,हवा बदनाम कर रहा है
जो था खिलाडी नांदा ,वो आराम कर रहा है
महनत से खेला जो वो जग में नाम कर रहा है
ये भाग्य है जो जीतना नाकाम कर रहा है
बाजी पलट वो उसका घर नीलाम कर रहा है
अन्तर
जो तेरे पास है मुझे वो मिल नही सकता
जो मेरे पास है वो तुझसे झिल नही सकता
मिला उपहार में सोने का एक पालना तुझको
जिसमे दासी ने हमेशा तुझे झूला झुलाया है
मगर मुझको मेरी माँ ने डाल के कपड़े का झूला
लोरियाँ दे के एक पेड़ के नीचे सुलाया है
सिले हैं ऐसे मोती के कोई भी हिल नहीं सकता
छेड़ इतने मेरे झूले में कोई सिल नहीं सकता
जो -----------------------
बना के नये नये व्यंजन सजा दिये तेरे लिये
पलंग भी गद्देदार है ,खुशबूदार है तेरा
मुझे भर पेट रोटियां मिले कभी कभी यंहा
और सोने को फुटपाथ ,ये नसीब है मेरा
कैसे कहूं तू फूल वो जो खिल नहीं सकता
कैसे कहूं मैं घाव वो जो छिल नहीं सकता
जो ------------------------
शालिनी शर्मा
जो तेरे पास है मुझे वो मिल नही सकता
जो मेरे पास है वो तुझसे झिल नही सकता
मिला उपहार में सोने का एक पालना तुझको
जिसमे दासी ने हमेशा तुझे झूला झुलाया है
मगर मुझको मेरी माँ ने डाल के कपड़े का झूला
लोरियाँ दे के एक पेड़ के नीचे सुलाया है
सिले हैं ऐसे मोती के कोई भी हिल नहीं सकता
छेड़ इतने मेरे झूले में कोई सिल नहीं सकता
जो -----------------------
बना के नये नये व्यंजन सजा दिये तेरे लिये
पलंग भी गद्देदार है ,खुशबूदार है तेरा
मुझे भर पेट रोटियां मिले कभी कभी यंहा
और सोने को फुटपाथ ,ये नसीब है मेरा
कैसे कहूं तू फूल वो जो खिल नहीं सकता
कैसे कहूं मैं घाव वो जो छिल नहीं सकता
जो ------------------------
शालिनी शर्मा
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