देखे हैं हमने ऐसे सवेरे सूरज पे हावी हैं धुंद और कोहरे
सायों से मुंह छिपाते देखे असली चेहरे
अर्थी के फूलो से से सजते देखे सेहरे
सूरज पे------------------
मेरे शहर में है ऐसी भी बस्ती
जहां सांसे महंगी मोते हैं सस्ती
खुशियां हैं बंदी गमो के हैं पहरे
सूरज पे ------------------
बचपन बुढ़ापे में अंतर ना कोई
जवानी जवां हो जहां जवानी पे रोई
मायूसियों ने छीने सपने सुनहरे
सूरज पे ----------
घर के बगीचे की खिलती कली थी
माली के आँचल में हंस के पली थी
दिन थे त्योहार ,होली दीवाली दशहरे
सूरज पे-----------------------
डाली से बिछड़ी तो घिर गयी गैरों में
आंधी उड़ा के ले गयी कुचली गयी पैरो में
कोमल हृदय है घायल घाव हैं गहरे
सूरज पे----------------------
अँखियों का सागर थमता नही है
कोई इलाज इनके गम का नही है
लाएं तबाही हरदम बिगड़ैल लहरें
सूरज पे -----------------------
समुंदर में तूफां है आगे ना जाओ
खतरा है ना किश्ती आगे बढ़ाओ
बुरे वक्त में सब हैं अंधे बहरे बहरे
सूरज पे ---------------------
शालिनी शर्मा
सायों से मुंह छिपाते देखे असली चेहरे
अर्थी के फूलो से से सजते देखे सेहरे
सूरज पे------------------
मेरे शहर में है ऐसी भी बस्ती
जहां सांसे महंगी मोते हैं सस्ती
खुशियां हैं बंदी गमो के हैं पहरे
सूरज पे ------------------
बचपन बुढ़ापे में अंतर ना कोई
जवानी जवां हो जहां जवानी पे रोई
मायूसियों ने छीने सपने सुनहरे
सूरज पे ----------
घर के बगीचे की खिलती कली थी
माली के आँचल में हंस के पली थी
दिन थे त्योहार ,होली दीवाली दशहरे
सूरज पे-----------------------
डाली से बिछड़ी तो घिर गयी गैरों में
आंधी उड़ा के ले गयी कुचली गयी पैरो में
कोमल हृदय है घायल घाव हैं गहरे
सूरज पे----------------------
अँखियों का सागर थमता नही है
कोई इलाज इनके गम का नही है
लाएं तबाही हरदम बिगड़ैल लहरें
सूरज पे -----------------------
समुंदर में तूफां है आगे ना जाओ
खतरा है ना किश्ती आगे बढ़ाओ
बुरे वक्त में सब हैं अंधे बहरे बहरे
सूरज पे ---------------------
शालिनी शर्मा
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