तू भी सुना कुछ नग्में
मैं भी सुनाऊ गीत
तू बन जा मेरा हमदम
मैं तेरे मन का मीत
जो आँख मेरी नम हो
तू भी ना मुस्कुराये
मेरी हो चिंता गर कोई
तो तू भी सो ना पाये
आ बांधें दिल का बंधन
दिल में जगायें प्रीत
तू बन जा -------------
ऊँच नीच जाति भाषा
धर्म ना विचारे
इंसानियत के संग
सभी रिश्ते हों हमारे
मैं जीतू दिल को तेरे
तू भी मेरा दिल जीत
तू बन जा ---------------
आ मिल के ऐसी बस्ती
इस शहर में बसाएं
बुनियाद में ही जिसकी रस
बस प्यार का मिलायें
आ त्याग तू भी मैं भी त्यागूँ
छोटेपन की रीत
तू बन जा -----------------
शालिनी शर्मा
गाजियाबाद
मैं भी सुनाऊ गीत
तू बन जा मेरा हमदम
मैं तेरे मन का मीत
जो आँख मेरी नम हो
तू भी ना मुस्कुराये
मेरी हो चिंता गर कोई
तो तू भी सो ना पाये
आ बांधें दिल का बंधन
दिल में जगायें प्रीत
तू बन जा -------------
ऊँच नीच जाति भाषा
धर्म ना विचारे
इंसानियत के संग
सभी रिश्ते हों हमारे
मैं जीतू दिल को तेरे
तू भी मेरा दिल जीत
तू बन जा ---------------
आ मिल के ऐसी बस्ती
इस शहर में बसाएं
बुनियाद में ही जिसकी रस
बस प्यार का मिलायें
आ त्याग तू भी मैं भी त्यागूँ
छोटेपन की रीत
तू बन जा -----------------
शालिनी शर्मा
गाजियाबाद

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