तू किस घड़ी मेरा खुद से जुड़ाव देखेगा
कभी तो आके मेरे दिल के घाव देखेगा
है बेखुदी झुकी नजर है हड़बड़ाहट सी
तू आके कब मेरे चेहरे के भाव देखेगा
कभी तो ---------------
अभी तो मैं तेरे पैरो की आहटे सुनती
मेरी हो आहट कब मेरे तू पांव देखेगा
कभी तो ---------------
सभी से मिल के गुफ्तगूं तूने कर ली है
मेरी नजर की नमी कब बहाव देखेगा
कभी तो ---------------
तू जंहा वंहा मैं आती हूँ तेरी हर बात को सराहती हूँ
तू कब ये सब जुड़ाव देखेगा
कभी तो -------------
शालिनी शर्मा
कभी तो आके मेरे दिल के घाव देखेगा
है बेखुदी झुकी नजर है हड़बड़ाहट सी
तू आके कब मेरे चेहरे के भाव देखेगा
कभी तो ---------------
अभी तो मैं तेरे पैरो की आहटे सुनती
मेरी हो आहट कब मेरे तू पांव देखेगा
कभी तो ---------------
सभी से मिल के गुफ्तगूं तूने कर ली है
मेरी नजर की नमी कब बहाव देखेगा
कभी तो ---------------
तू जंहा वंहा मैं आती हूँ तेरी हर बात को सराहती हूँ
तू कब ये सब जुड़ाव देखेगा
कभी तो -------------

शालिनी शर्मा
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