NAMAN

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SMILE

Tuesday, 29 March 2016

GAJAL


                       गज़ल

तुमने  कहा रुकने को पर हम  ना रुक सके 
रुसवाइयों का  डर था ,  ना भाव  छुप  सके
            कहना तो चाहते थे    दिल  की  सभी  बातें 
            बन्दिश थी शर्म की ,पर कह  ना कुछ सके 
तुम रूठ  कर गये तो फिर ना लोट के आये 
ऐसी अना भी क्या ना जो थोड़ा सा झुक सके 
            विश्वास तोड़ के मेरा सब कुछ जला दिया 
           मेरी नजर से गिर के वो फिर ना उठ सके 
लावारिसों की मौत मर गया वो इस तरह 
कांधे को चार लोग ना एक साथ जुट सके 
         सोहबत बुरी थी मुझपे भी इसका असर हुआ 
         जितनी थी बुरी लत लगी ना उनसे छुट सके
                                         शालिनी शर्मा  
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Sunday, 27 March 2016

MUSHKIL

























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Tuesday, 8 December 2015

Phool

अलग अन्दाज में ये फूल स्वागत सबका करते हैं 
ना शिकवा ,ना शिकायत ,ना गिला ना बैर करते हैं 
जब भी मिलते हैं हंस के मिलते हैं जिंदादिली से ये
खुशबुएँ देने का ये कार्य स्वार्थ बगैर करते हैं
















Tuesday, 9 June 2015

SMILE PLEASE BLUE BOTTLE

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च्छर  मक्खी को पाला जा रहा है 
गन्दगी को सम्भाला जा रहा है       
कहाँ जाये बदबू को छोड़ कर 
शहर बीच घर के पास एक नाला जा रहा है 
                                            शालिनी शर्मा