NAMAN

NAMAN
SMILE

Thursday, 21 July 2016

NATURE

तू शबनम की बूँद 
पवन है सुबह सुबह बहने वाली 
तू सर्द चाँदनी रात 
कोयलिया कुहु कुहु कहने वाली 
नयनाभिराम नव धवल शिखर ,
झरना है गीत सुनाता है 
तू शान्त समुन्दर सा गहरा
है  लहर विचल भी जाता है 
उन्मुक्त भोर की किरण है तू 
तू है चिड़ियों का कोलाहल 
तू तो सावन की रिमझिम है 
बादल तू इन्द्रधनुषी हलचल 
फूलो की घाटी का उपवन 
तू चमन नजर ना आये 
दुनिया की नजरो से छिपकर भी 
गुलशन तू महकाये 
                        शालिनी शर्मा 
नमस्कार दोस्तों 
आज प्रकृति की खूबसूरती को शब्दो में कहने का मन किया तो एक नयी कविता का जन्म हो गया। प्रकृति की सुन्दरता के विवरण से पूरा साहित्य भरा पड़ा है जिन्होंने भी प्रकृति का वर्णन किया उनसब को प्रणाम करती हूँ और अपनी ये छोटी सी रचना आप सब की नजर करती हूँ। आशा है हमेशा की तरह आपका समर्थन मिलेगा। सृजनकर्ता ने हमारी धरती को क्या क्या नायाब चीजे दी है और एक हम हैं की इन्हें सम्भाल नही पा रहे । 
                                       प्लीज -----------------
     SAVE NATURE SAVE FUTURE


No comments:

Post a Comment